राजा भैया केस में SC का साफ संदेश: “जब मामला हाईकोर्ट में है, हम क्यों दखल दें?”

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह से जुड़े घरेलू विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा कि मामला अभी उच्च न्यायालय (High Court) में लंबित है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का दखल देना न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ होगा।

भानवी सिंह की याचिका पर क्यों नहीं हुई सुनवाई

भानवी सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले के शीघ्र निपटारे की मांग की गई थी।

लेकिन पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब मामला पहले से हाईकोर्ट में विचाराधीन है, तो सुप्रीम कोर्ट समांतर हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

Justice BV Nagarathna का अहम बयान

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा— “इस मामले का त्वरित निपटान उच्च न्यायालय के समक्ष है। याचिकाकर्ता उस मंच पर शीघ्र सुनवाई के लिए दबाव डालने के लिए स्वतंत्र है।”

उन्होंने आगे कहा— “जब मामला लंबित है, तो हम हस्तक्षेप कैसे कर सकते हैं? यह 2024 का मामला है और हम कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं कर सकते।”

DV Act और हाईकोर्ट की भूमिका

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि हाईकोर्ट पहले ही Domestic Violence Act के तहत भानवी सिंह की याचिका में दिए गए अंतरिम आदेश (Interim Order) पर रोक लगा चुका है।

इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने मामले को हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में पूरी तरह खुला छोड़ दिया।

चार महीने की समय-सीमा पर क्यों चुप्पी

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह संकेत जरूर दिया कि यदि उचित परिस्थितियां होतीं तो चार महीने के भीतर निर्णय की बात कही जा सकती थी,
लेकिन मौजूदा हालात में कोई binding timeline तय करना संभव नहीं है।

कानूनी संकेत क्या कहता है?

कानूनी जानकारों के मुताबिक, यह आदेश साफ इशारा करता है कि सुप्रीम कोर्ट ट्रायल या अपील से पहले हाईकोर्ट की प्रक्रिया में  अनावश्यक दखल नहीं देना चाहता।

यानी गेंद अब पूरी तरह High Court के पाले में है।

भारत की न्यायपालिका का संदेश साफ है— पहले सीढ़ी चढ़ो, सीधे छत पर कूदने की इजाज़त नहीं।

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